ट्राॅफिक पुलिस की कार्यशैली पर लग रहा है प्रश्न चिन्ह ।
रसूखदारों व राजनेतिक पहुंच वालों के चालान ना काट कर आमजन पर हावी है ट्राॅफिक पुलिस ।
The trophy police looks at the work style.
Trophy police is dominated by the people who do not cut the invoices and the people of the politicians.
ट्राॅफिक पुलिस की नजर पटरी से उतरती ट्रैफिक व्यवस्था पर नहीं ,चालान काट कर अपने कार्यो से कर रही है इतिश्री
जैसलमेर ✒️ स्वर्ण नगरी जैसलमेर में पर्यटन सीजन व दिपावली त्यौहार शुरू होते ही लोग हजारों की तादाद में फेस्टिवल मनाने व आनन्द लेने स्वर्ण नगरी पहुंच रहे है। पर्यटको की अवाजाही के कारण बढ़ रहे वाहनों का बोझ जिले की ट्राफिक पुलिस सह नहीं पा रही हैं। नतीजतनए सड़कों पर वाहन चलते नहीं रेंगते नजर आते हैं। पर्यटन सीजन में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती नजर आ रही है।
स्वर्ण नगरी जैसलमेर में पर्यटन की दृष्टि से हमेशा से ही सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां विश्व प्रसिद्ध सोनार दुर्ग,पटवा की हवेली,गडसीसर लेक,बडाबाग,कुलधरा,सम डेजर्ट आदि पर्यटन स्थल हैं। पर्यटन सीजन में लाखों की संख्या में पर्यटक अपने निजी और किराए के वाहनों में स्वर्ण नगरी जैसलमेर की ओर रुख करते हैं। यहां आकर उनका सबसे पहले सामना ट्राफिक जाम से होता है। यह किसी भी पर्यटक के लिए सबसे दुखदाई स्थिति है। पर्यटक भले ही इस प्रकार की स्थिति में कभी कभार ही दो.चार होते हों लेकिन शहरवाषियों के लिए तो यह नियति बन चुकी है। वाहनों की इस बढ़ती संख्या का सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण सड़कों का चैड़ीकरण और उचित पार्किंग व्यवस्था न हो पाना है। पार्किंग न होने के चलते वाहन सड़कों के दोनों कोने पर खड़े रहते हैं। इस कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। पर्यटन स्थलों की चरमराई यातायात व्यवस्था पर्यटकों को काफी कटु अनुभव देती है। बावजूद इसके ट्राॅफिक पुलिस की नजर पटरी से उतरती ट्रैफिक व्यवस्था पर नहीं पड़ रही है। पुलिस भी चालान काट कर अपने कार्यो से इतिश्री कर रही है।
स्वर्णनगरी में अब यह हालात है कि जहां भी जगह मिलती है वहां बड़े छोटे वाहन पार्क कर दिए जाते हैं। मुख्य बाजार में शाम के समय कई वाहन पार्क होते है जिससे जाम लग जाता है। शाम के समय बाजार में भीड़ भी अधिक होती है उस स्थिति में बाजार से निकलना बेहद कठिन हो जाता है। वाहन चालक अपनी मनमर्जी से वाहन को सड़क के बीच में खड़ा कर देते हैं। इस पर ट्राॅफिक पुलिस कर्मी भी कोई कार्रवाई नहीं करते है। जो ट्राॅफिक व्यवस्था को बिगाड़ने का सबसे बड़ा कारण है। शहर में दुकानों के आगे वाहन चालक बेतरतीब वाहनों को छोड़ देते है। जिससे कई बार मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। जैसलमेर शहर बहुत ही छोटे क्षेत्र में फैला हुआ है। शहर की मुख्य सड़के बहुत ही संकड़ी हैे जिस पर भी बिगड़ी ट्राॅफिक व्यवस्था के कारण लंबे जाम लग जाते है। कई बार संकड़ी रोड में भारी वाहनों के प्रवेश के कारण भारी जाम लग जाते है जिससे राहगीरों को समय के नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है।
बिगड़ी ट्राॅफिक व्यस्था में स्वछंद पशुओं का विचरण भी बड़ा कारण है। बाजार में स्वछंद विचरण करने वाले पशु कभी भी कहीं भी बैठ जाते है। जिससे राहगीरों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वछंद पशुओं की आपस में कई बार भिडंत भी हो जाती है जिससे वाहनों के नुकसान के साथ कई बार स्थानीय सैलानियों को भी चोटे लग चुकी है।
शहर की बाजारें छोटी होने के कारण भीतरी हिस्से में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जिस पर भी वाहन मालिकों द्वारा शहर के भीतरी हिस्सों में मनमर्जी से वाहनों को खड़ा कर दिया जाता है। कई बार बेतरतीब खड़े वाहनों के पीछे लोगों में आपस में कहासुनी तक हो जाती है।
ट्राॅफिक पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। बदहाल ट्राॅफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए पहले पुलिस को सुधरना होगा। लोगों मेें ट्राॅफिक पुलिस के दुव्र्यवहार को लेकर आक्रोश है।
शहर की बदहाल ट्राॅफिक सुधरने का नाम नहीं ले रही। लोगों को बदहाल यातायात से रोज परेशानी उठानी पड़ रही है। शहर के मुख्य मार्ग में जगह-जगह जाम में लोग फंस रहे हैं। पुलिस की कार्यशैली को ले लोगों में रोष व्याप्त है। व्यापारी, मजदूर या फिर आम नागरिक सभी बदहाल यातायात से परेशान हैं। लोगों की मानें, तो शहर की यातायात को सुधारने के लिए पहले पुलिस र्किर्मयों को सुधरना अति आवश्यक है। लोगों के साथ पुलिस का रवैया समझ से परे है। कुछ कहो तो वर्दी का धौंस और न कहो तो जेब ढीली करनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर पहुंचने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हंै। शहर सीमा क्षेत्रों में वाहनों को रोककर चालानी कार्रवाई की जाती है। और तो और शहर में यातायात सुधार तो दिख नही रहा, उल्टे विवाद की स्थिति रोज निर्मित हो रही। आए दिन नागरिकों, व्यापारियों व मजदूरों से यातायात प्रभारी की नोकझोंक हो रही है। ट्रैफिक सुधार के नाम पर बेवजह चालानी कार्रवाई की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस यातायात व्यवस्था बनाने से ज्यादा कमाई पर ध्यान देती है। शहर के मुख्य मार्ग में बड़ी-बड़ी वाहने खड़ी रहती है। रसूखदारों की कार पर कार्रवाई नही होती।
स्वर्ण नगरी जैसलमेर में ट्राॅफिक पुलिस द्वारा ट्राॅफिक व्यवस्था के लिये शहर में कुल 12 स्थानों को चिन्हित किया गया है,जबकि ट्राॅफिक पुलिस के पास सबइंस्पेक्टर 01, सहा.सबइंस्पेक्टर 01,हैडकांस्टेबल 03 और पुलिस कांस्टेबल 15 स्टाफ उपलब्ध है। जबकि महिला वर्ग के वाहनों चालन काटने के लिये कोई महिला पुलिस कांस्टेबल या हैड कांस्टेबल नही है। ट्राॅफिक व्यवस्था के लिये 12 स्थान चिन्हित करनें के बाद भी ट्राॅफिक पुलिस द्वारा मात्र 6 स्थानों पर सक्रिय होकर मात्र हैलमेंट के चालान काटनें में व्यस्त है। जबकि अन्य चिन्हित स्थानों पर ट्राॅफिक व्यवस्था रामभरोसे है। 01 अक्टूम्बर 2021 से हैलमेंट अभियान प्रारम्भ किया गया जो कि 16 अक्टूम्बर 2021 को ट्रैफिक पुलिस द्वारा हैलमेंट के 605 चालान, सीट बैल्ट के 02 चालान, दुपहियां वाहन पर 03 सवारी के 02 चालान,वाहन चलाते मोबाईल पर बात करते हुए 01 चालान ,नो पार्किंग में खडे वाहनों के 210 चालान काटे गये है। ट्राफिक पुलिस ने 16 दिवस में मात्र 820 चालान काटे है। ऐसे में सवाल उठता है कि चालन सिर्फ बाइक के ही क्यों हो रहें है? महंगी गाड़ी वालों के चालन कटने की खबर क्यों नहीं आ रही है? इससे साफ जाहिर होता है कि ट्राॅफिक पुलिस द्वारा रसूखदारों व राजनेतिक पहुंच वालों के चालान ना काट कर उन लोगो के चालान कर रही जो मजदूर वर्ग के है और मजदूरी करनें गांव से शहर की ओर आते है।

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