बांग्लादेश में हिंदू महिला से सामूहिक दुष्कर्म, बाल काटे और पेड़ से बांधकर पीटा।

Maru Darpan ( India News)

बांग्लादेश में हिंदू महिला से सामूहिक दुष्कर्म, बाल काटे और पेड़ से बांधकर पीटा। 
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बैंगलूरू में धार्मिक जुलूस पर पथराव।

पीएम मोदी ने एक हजार वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर को गजनी के महमूद द्वारा तोड़े जाने की याद की दिलाई। जवाहर लाल नेहरू की सच्चाई भी बताई।
भारत के सनातनियों को जगाने और समझाने के लिए इससे ज्यादा क्या किया जा सकता है।
पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जारी है। इस मुस्लिम बाहुल्य देश में 5 जनवरी को भी एक हिंदू महिला के साथ पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर बाल काट कर पेड़ से बांधकर बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नहीं इस अत्याचार का वीडियो बनाकर वायरल भी किया गया। इसी दिन बांग्लादेश में 38 वर्षीय हिन्दू युवक राणा प्रताप बैरागी की भी हत्या कर दी गई। इसी दिन भारत के कर्नाटक के बैंगलूरू में हिंदुओं के धार्मिक जुलूस पर पथराव किया गया। इस पथराव में अनेक श्रद्धालु घायल हो गए। आरोप है कि कर्नाटक में कांग्रेस के शासन में तुष्टीकरण की नीति के चलते हिंदुओं के जुलूस पर पथराव किया गया। 5 जनवरी को जिस दिन बांग्लादेश और कर्नाटक में हिंदू विरोधी घटनाएं हुई, इसी दिन अखबारों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख प्रकाशित हुआ हैै। इस लेख में पीएम मोदी ने एक हजार वर्ष पूर्व गुजरात के सोमनाथ के मंदिर पर आक्रमणकारी गजनी के महदू के हमले का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने बताया कि किस तरह जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने हमारी धार्मिक आस्थाओं पर हमला किया। पीएम ने अपने लेख में बताया कि 1947 में देश की आजादी के बाद पहली दीपावली को तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल सोमनाथ के मंदिर में गए और दीप प्रज्वलित किए, तब पटेल ने मंदिर का जीर्णोद्धार करने का संकल्प लिया। यह बात अलग रही कि जब 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया तब सरदार पटेल नहीं रहे थे। पीएम ने अपने लेख में लिखा है कि हिंदुओं के इस मंदिर के जीर्णोद्धार के कार्यक्रम में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति से तबके प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू खुश नहीं थे, लेकिन राजेंद्र प्रसाद मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में उपस्थित हुए। आज सोमनाथ का मंदिर भव्य रूप से हमारे सामने हैं, लेकिन हमें सोमनाथ के मंदिर को तोड़े जाने की घटना को एक हजार वर्ष बाद भी याद रखने की जरूरत है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के संदर्भ में पीएम मोदी का 5 जनवरी को लेख बहुत ही महत्व रखता है। देश के मौजूदा हालातों में सनातनियों को जगाने और समझाने के लिए इससे ज्यादा और कुछ नहीं किया जा सकता।

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