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➠ वेब मीडिया न्यूज पोर्टल सम्पादक : सियाराम विश्नोई जाम्बा
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NEWS PORTAL : 27/290 NIC CODE : 63910
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जयपुर से खबर
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📺 BBC दुनिया 📺
बाप से नशीली दवाई के साथ गिरफ्तार
रामदेवरा से खबर
रामदेवरा ग्राम पंचायत सरपंच तत्काल प्रभाव से निलम्बित
जोधपुर संभागीय आयुक्त ने जारी किए आदेश
जैसलमेर, 26 मई/जोधपुर संभागीय आयुक्त डॉ. राजेश शर्मा ने एक आदेश जारी कर जैसलमेर जिले की सांकड़ा पंचायत समिति अन्तर्गत रामदेवरा ग्राम पंचायत के सरपंच समन्दरसिंह को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया है।
आदेश के अनुसार उनके विरूद्ध विचाराधीन विभागीय जांच के अध्ययधीन राजस्थान पंचायतराज अधिनियम 1994 की धारा 38(4) के तहत यह निलम्बन किया गया है।
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जयपुर से खबर
भूखण्डों एवं भवनों की बकाया लीज राशि का मामला
एकमुश्त जमा कराने पर ब्याज में 100 प्रतिशत छूट, अवधि को 31 जुलाई, 2021 तक बढ़ाया, मुख्यमंत्री ने दी फाइल को मंजूरी।
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अजमेर से खबर
झांसे बाज ने सिपाही से ठगे 40 हजार रुपए
आर्मी का जवान बनकर यातायात पुलिसकर्मी से की ठगी, कैलाश मीणा से ऑनलाइन बाइक के नाम पर की ठगी, सिपाही ने सिविल लाइन थाने पर दर्ज करवाया प्रकरण, सस्ती दर पर नई बाइक लेने के चक्कर में लालच में आया पुलिसकर्मी।
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जयपुर से खबर
मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना से जुड़ी बड़ी खबर
योजना से जुड़े अस्पताल इलाज से करें इनकार तो यहां करें शिकायत, 18001806127 पर दर्ज करवाएं शिकायत।
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पत्रकार कविकान्त खत्री की कलम से कवरेज समाचार
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उङिसा में यास चक्रवाती तुफान
उङिसा राज्य के तटीय क्षेत्रो में समुन्द्र की तुफानी लहरे व उङिसा में तहस नहस कर चुका हैं याश तुफान । इस चक्रवाती तुफान ने उङिसा में तबाही मचाई । उङिसा राज्य व भारत में पहली बार स्ट्रोंग तुफान देखा गया जिसने 3 लाख घरो को उजाङा तथा पेङ पौधे नष्ट हो गये । उङिसा में समुन्द्र बन चुका हैं निचे दी गई लिंक को क्लिक करके विडियो देखें ।
https://youtu.be/r9E3bsK7eUI
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वेब न्यूज पोर्टल सम्पादक : सियाराम विश्नोई जाम्बा
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।। पुण्यों का मोल।।
.दान से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल भी नष्ट हो जाते हैं।
.शास्त्रों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस पुण्य कर्म में समाज में समानता का भाव बना रहता है और जरुरतमंद व्यक्ति को भी जीवन के लिए उपयोगी चीजें प्राप्त हो पाती है।
.एक व्यापारी जितना अमीर था उतना ही दान-पुण्य करने वाला. वह सदैव यज्ञ-पूजा आदि कराता रहता था.
.एक यज्ञ में उसने अपना सबकुछ दान कर दिया. अब उसके पास परिवार चलाने लायक भी पैसे नहीं बचे थे.
.व्यापारी की पत्नी ने सुझाव दिया कि पड़ोस के नगर में एक बड़े सेठ रहते हैं. वह दूसरों के पुण्य खरीदते हैं.
.आप उनके पास जाइए और अपने कुछ पुण्य बेचकर थोड़े पैसे ले आइए जिससे फिर से काम-धंधा शुरू हो सके.
.पुण्य बेचने की व्यापारी की बिलकुल इच्छा नहीं थी लेकिन पत्नी के दबाव और बच्चों की चिंता में वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ. पत्नी ने रास्ते में खाने के लिए चार रोटियां बनाकर दे दीं.
.व्यापारी चलता-चलता उस नगर के पास पहुंचा जहां पुण्य के खरीदार सेठ रहते थे. उसे भूख लगी थी.
.नगर में प्रवेश करने से पहले उसने सोचा भोजन कर लिया जाए. उसने जैसे ही रोटियां निकालीं एक कुतिया तुरंत के जन्मे अपने तीन बच्चों के साथ आ खड़ी हुई.
.कुतिया ने बच्चे जंगल में जन्म दिए थे. बारिश के दिन थे और बच्चे छोटे थे इसलिए वह उन्हें छोड़कर नगर में नहीं जा सकती थी.
.व्यापारी को दया आ गई. उसने एक रोटी कुतिया को खाने के लिए दे दिया.
.कुतिया पलक झपकते रोटी चट कर गई लेकिन वह अब भी भूख से हांफ रही थी.
.व्यापारी ने दूसरी रोटी, फिर तीसरी और फिर चारो रोटियां कुतिया को खिला दीं. खुद केवल पानी पीकर सेठ के पास पहुंचा.
.व्यापारी ने सेठ से कहा कि वह अपना पुण्य बेचने आया है. सेठ व्यस्त था. उसने कहा कि शाम को आओ.
.दोपहर में सेठ भोजन के लिए घर गया और उसने अपनी पत्नी को बताया कि एक व्यापारी अपने पुण्य बेचने आया है. उसका कौन सा पुण्य खरीदूं.
.सेठ की पत्नी बहुत पतिव्रता और सिद्ध थी. उसने ध्यान लगाकर देख लिया कि आज व्यापारी ने कुतिया को रोटी खिलाई है.
.उसने अपने पति से कहा कि उसका आज का पुण्य खरीदना जो उसने एक जानवर को रोटी खिलाकर कमाया है. वह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ पुण्य है.
.व्यापारी शाम को फिर अपना पुण्य बेचने आया. सेठ ने कहा- आज आपने जो यज्ञ किया है मैं उसका पुण्य लेना चाहता हूं.
.व्यापारी हंसने लगा. उसने कहा कि अगर मेरे पास यज्ञ के लिए पैसे होते तो क्या मैं आपके पास पुण्य बेचने आता!
.सेठ ने कहा कि आज आपने किसी भूखे जानवर को भोजन कराकर उसके और उसके बच्चों के प्राणों की रक्षा की है. मुझे वही पुण्य चाहिए.
.व्यापारी वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ. सेठ ने कहा कि उस पुण्य के बदले वह व्यापारी को चार रोटियों के वजन के बराबर हीरे-मोती देगा.
.चार रोटियां बनाई गईं और उसे तराजू के एक पलड़े में रखा गया. दूसरे पलड़े में सेठ ने एक पोटली में भरकर हीरे-जवाहरात रखे.
.पलड़ा हिला तक नहीं. दूसरी पोटली मंगाई गई. फिर भी पलड़ा नहीं हिला.
.कई पोटलियों के रखने पर भी जब पलड़ा नहीं हिला तो व्यापारी ने कहा- सेठजी, मैंने विचार बदल दिया है. मैं अब पुण्य नहीं बेचना चाहता.
.व्यापारी खाली हाथ अपने घर की ओर चल पड़ा. उसे डर हुआ कि कहीं घर में घुसते ही पत्नी के साथ कलह न शुरू हो जाए.
.जहां उसने कुतिया को रोटियां डाली थीं वहां से कुछ कंकड़-पत्थर उठाए और साथ में रखकर गांठ बांध दी.
.घर पहुंचने पर पत्नी ने पूछा कि पुण्य बेचकर कितने पैसे मिले तो उसने थैली दिखाई और कहा इसे भोजन के बाद रात को ही खोलेंगे. इसके बाद गांव में कुछ उधार मांगने चला गया.
.इधर उसकी पत्नी ने जबसे थैली देखी थी उसे सब्र नहीं हो रहा था. पति के जाते ही उसने थैली खोली.
.उसकी आंखे फटी रह गईं. थैली हीरे-जवाहरातों से भरी थी.
.व्यापारी घर लौटा तो उसकी पत्नी ने पूछा कि पुण्यों का इतना अच्छा मोल किसने दिया ? इतने हीरे-जवाहरात कहां से आए ?
.व्यापारी को अंदेशा हुआ कि पत्नी सारा भेद जानकर ताने तो नहीं मार रही लेकिन उसके चेहरे की चमक से ऐसा लग नहीं रहा था.
.व्यापारी ने कहा- दिखाओ कहां हैं हीरे-जवाहरात. पत्नी ने लाकर पोटली उसके सामने उलट दी. उसमें से बेशकीमती रत्न गिरे. व्यापारी हैरान रह गया.
.फिर उसने पत्नी को सारी बात बता दी. पत्नी को पछतावा हुआ कि उसने अपने पति को विपत्ति में पुण्य बेचने को विवश किया.
.दोनों ने तय किया कि वह इसमें से कुछ अंश निकालकर व्यापार शुरू करेंगे. व्यापार से प्राप्त धन को इसमें मिलाकर जनकल्याण में लगा देंगे.
.ईश्वर आपकी परीक्षा लेता है. परीक्षा में वह सबसे ज्यादा आपके उसी गुण को परखता है जिस पर आपको गर्व हो.
.अगर आप परीक्षा में खरे उतर जाते हैं तो ईश्वर वह गुण आपमें हमेशा के लिए वरदान स्वरूप दे देते हैं.
.अगर परीक्षा में उतीर्ण न हुए तो ईश्वर उस गुण के लिए योग्य किसी अन्य व्यक्ति की तलाश में लग जाते हैं.
.इसलिए विपत्तिकाल में भी भगवान पर भरोसा रखकर सही राह चलनी चाहिए. आपके कंकड़-पत्थर भी अनमोल रत्न हैं..!!
जय जय श्री राधे
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ईश्वर को मनाना आसान लेकिन दुनियां को मनाना नामुमकिन ।
एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!
पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!
तो आईं तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया...
पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"
पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली...
उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया*...
दूसरी बोली--
"साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई..
अभी रोष नहीं गया,तकिया फेंक दिया।"
तब साधु सोचने लगा, अब वह क्या करें ?
तब तीसरी बोली--
"बाबा! यह तो पनघट है,यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी, बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?"
लेकिन चौथी ने
बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी-
"क्षमा करना,लेकिन हमको लगता है,तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है,अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है।
दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तुम जैसे भी हो,हरिनाम लेते रहो।"
सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना...
आप ऊपर देखकर चलोगे तो कहेंगे...
"अभिमानी हो गए।"
नीचे देखोगे तो कहेंगे...
"बस किसी के सामने देखते ही नहीं।"
आंखे बंद करोगे तो कहेंगे कि...
"ध्यान का नाटक कर रहा है।"
चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि...
"निगाह का ठिकाना नहीं। निगाह घूमती ही रहती है।"
और परेशान होकर आंख फोड़ लोगे तो यही दुनिया कहेगी कि...
"किया हुआ भोगना ही पड़ता है।"
ईश्वर को राजी करना आसान है,
लेकिन संसार को राजी करना असंभव है..
इसलिए दुनिया क्या कहेगी,उस पर ध्यान दोगे तो आप अपना ध्यान नहीं लगा पाओगे..!!
जय जय श्री राधे
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