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वा रे शूरमा किसी शायर ने अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है..... था मैं नींद में और.
छोरा ने मोबाइल खाग्यो, किश्तां खागी तिनखा ने। लुगायां ने  फैसन  खागी, चिंता खागी मिनखां ने।।
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