वा रे शूरमा किसी शायर ने अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है..... था मैं नींद में और.

अब तक राजस्थान

वा रे शूरमा
किसी शायर ने अंतिम यात्रा
का क्या खूब वर्णन किया है.....
था मैं नींद में और. 
मुझे इतना सजाया जा रहा था....
बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था....
ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर में....
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा था....
था पास मेरा हर अपना उस वक़्त....
फिर भी मैं हर किसी के
मन से भुलाया जा रहा था...
जो कभी देखते भी न थे मोहब्बत की
निगाहों से....
उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर लुटाया जा रहा था...
मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते हुए देख कर....
जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...
काँप उठी मेरी रूह वो मंज़र देख कर.... 


जहाँ मुझे हमेशा के
लिए सुलाया जा रहा था....
मोहब्बत की इन्तहा थी जिन दिलों में मेरे लिए....
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!!  : अमर शहीद हेमेंद्र गोदारा की अंतिम यात्रा में शामिल 
नमन आंखों से सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की
हम चैन से सो पाए इसलिए ही वो सो गया,
वो भारतीय फौजी ही था जो आज शहीद हो गया.
जय हिन्द इंकलाब जिंदाबाद 

हमारी दिवाली में रोशनी इसलिए हैं क्योंकि सरहद पर अँधेरे में कोई खड़ा हैं.
जय हिन्द

एक सैनिक ने क्या खूब कहा है.
किसी गजरे की खुशबु को महकता छोड़ आया हूँ,
मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ,
मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ,
मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ।
जय हिन्द

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