शब्द न 11
दिल साबित हज - काबो नेडे
महमद खाँ नागौरी द्वारा भेजा हुआ काजी अपने अंधविश्वास मे इतना डूबा था कि पुर्व शब्दों को सुनने के बाद भी उसने पुनः कहा कि काबे की हज करने पर हम मुसलमान पापों से मुक्त हो जाते है ।तब श्री देव ने उन्हें ये शब्द कहा :-
दिल साबत हज काबो नेड़े क्या उलबंग पुकारो
यदि तुम्हारा ह्रदय साफ हैं तो हज व काबा पास मैं ही हैं । यदि ह्रदय सचा हैं तो काबे के लिए हज की जरूरत नही हैं ।फिर तुम क्या जोर जोर से अजान लगाते हो ।वह अल्लाह (रहिम) तो तुम्हारे ह्रदय मैं ही हैं ।
सीने सरवर करो बन्दगी हक्क निवाज गुजारो
ह्रदय सरोवर हैं उसी मैं ईश्वर की वन्दना करो और हक की नवाज पढो ।नयायसंगत कार्य करते हुए नमाज पढो। प्रतिदिन केवल नमाज अदा करने से तो कुछ कार्य सफल नहीं हो सकेगा। जब तक अपने जीवन में हक की कमाई नहीं करोगे नमाज का अर्थ ही है की हम अपने जीवन को शुद्ध परोपकारमय बनाएं।
इहि हेड़े हरदिन की रोजी तो इसी रोजी सारो
ईमानदारी से भले ही कितना ही कठिन कार्य करना पड़े वहीं कार्य अपने जीवन यापन के लिए उत्तम हैं।बेईमानी से किया हुआ कर्म जीवन को बर्बाद कर देगा वह अच्छा कैसे हो सकता है।जीवन में शारीरिक परिश्रम करके जो कुछ प्राप्त होता है वही संतोषजनक हो सकता है।
आप खुदाय बंद लेखों मांगे रे विन्हे गुन्हे जीव क्यू मारो
मरणोपरांत स्वयं ईश्वर जीवन का हिसाब मांगेंगे इसलिए हैं भाई तुम बिना दोष के जिव हत्या कयो करते हो ।उन जीवो ने तेरा क्या अपराध किया था?जिससे तुमने उनको मार डाला तुझे किसी भी जीव को मारने का हक नहीं है। यदि तू किसी को जीवन दान नहीं दे सकता तो मृत्यु देने का क्या हक है?
थे तक जाणो तक पीड़ न जाणो विन परचै वाद निवाज गुजारो
आप लोग जीवों को मारना तो जानते हो किंतु उनकी पीड़ा को नहीं जानते अर्थात आपके पास सहानुभूति नहीं है अपने जीवन में कभी किसी सतगुरु की बात का विश्वास पूर्ण श्रवण नहीं किया जिससे आतम ज्ञान प्राप्ति के बिना ही व्यर्थ में ही विवाद करते हो इसी प्रकार से अज्ञानी रहकर ही नमाज अदा करते हो तो इससे जीवन में कुछ भी लाभ नहीं होगा।
चर फिर आवे सहज दुहावै जिसका खीरी हलाली
तिसके गले करद क्यू सारो थे पढ़ सुण रहिया खाली
जो गौ वन में चरकर आती हैं और वापिस आकर स्वभाव से ही अमृत तुल्य दूध देती हैं।और तुम लोग उन निर्दोष प्राणियों के मस्तक को हलाल करते हो ।उनके गले पर तुम छुरी से वार करते हो । तो तुम लोग नवाज पढ़ लिख और सुनकर भी खाली ही रह गए। तुम्हारा पढ़ना लिखना व्यर्थ ही सिद्ध हो गया।
थे चढ़ चढ़ भीते मड़ी मसीते क्या उलबंग पुकारो
कारण खोटा करतब हीणा थारी खाली पड़ी निवाजू
गऊ आदि जीव धारियों का मांस भक्षण कर के फिर भीत,मेडी व मस्जिदों पर चढ़कर ऊची आवाज मैं क्या आजान लगाते हो।क्या ईश्वर बहरा या अंधा हो गया है जो तुम्हारे इन खोटे पाप कर्मों को नहीं सुनता और देखता।तुम्हारे द्वारा किए गए कार्य खोटे व निच हैं ।तुम्हारे द्वारा ये पढी गई नामाज व्यर्थ हैं जब तक तुम दुष्ट कर्मों का परित्याग नहीं करोगे ।
किहि ओजू तुम धोवो आप किहि ओजू तुम खण्डों पाप
किहि ओजू तुम धरो धियान किहि ओजू चीन्हों रहमान
इस प्रकार से जीव हत्या करते हुए फिर आप लोग किस प्रकार से नमाज़ पढने से पुर्व अपने शरीर को शुद्ध करते हो ।कौन सी शारिरिक शुद्वि से तुम अपने आप को पवित्र करते हो?और ऐसे करने से आप किस प्रकार से अपने पापों का नष्ट कर सकते हो ।ऐसा करके तुम कैसे ईश्वर का ध्यान करते हो ।और कैसे आप उस रहमान ईश्वर को पहचानते हो।इस प्रकार के दिखावे से ईश्वर नहीं मिल सकता।
रे मुल्ला मन मांही मसीत नमाज गुजारिये सुणता ना क्या खरे पुकारिये
रे मुल्ला काजी ! मस्जिद तुम्हारे दिल मे है उसी मैं ही नमाज़ पढो।क्या ईश्वर सुनता नही हे जो इस प्रकार खडे होकर जोर जोर से पुकार लगा रहे हो । वह तो घट घट की बात जानने वाला है।
अलख न लखियो खलक पिछांणयो चाम कटे क्या हुइयो
तुमने ईश्वर को पहचाना नहीं केवल संसारिकता मैं ही लगे रहे ।तो फिर सुन्नत कराने से क्या लाभ हुआ।
हक हलाल पिछांणयो नाही तो निशचै गाफल दौरे दीयों
इस संसार में रहते हुए कर्तव्य-अकर्त्तव्य, पाप पुण्य, हक बेहक की पहचान तो कि नहीं। विवेक बुद्धि से तो कार्य किया नहीं है और न ही ईश्वर पर विश्वास किया। गाफिल निश्चित ही तुझे खुदा ईश्वर दौरे नरक में ही डालेंगे।
क्षमा सहित निवण प्रणाम जी

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