आपराधिक कानूनों में संशोधन से जुड़े तीनों विधेयकों पर चर्चा शुरू; IPC, CPRPC और साक्ष्य अधिनियम की लेंगे जगह ।।।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनडीओएफओ की स्थापना का उद्देश्य विदेशी मूल के अपराधियों पर नजर रखने और उनके खिलाफ प्रभावी जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करना है। नित्यानंद राय ने लोकसभा में सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एनडीओएफओ ई-प्रिजन (राष्ट्रीय जेल सूचना पोर्टल) पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रखे गए डाटा का प्रयोग करता है। । सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों को 31 दिसम्बर तक अनिवार्य रूप से करवाना होगा वार्षिक भौतिक सत्यापन ।। I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक खत्म : बीजेपी को घेरने पर हुआ मंथन, सांसदों के निलंबन के साथ EVM पर हुई चर्चा . www.jhalko.online & www.jhalkojodhana.online

अब तक राजस्थान


आपराधिक कानूनों में संशोधन से जुड़े तीनों विधेयकों पर चर्चा शुरू; IPC, CPRPC और साक्ष्य अधिनियम की लेंगे जगह ।
ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्ष के 95 सांसदों के निलंबन और अन्य विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति के बीच लोकसभा में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े तीन विधेयकों पर चर्चा शुरू हो गई। आइपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जुड़े तीनों विधेयकों पर के साथ चर्चा शुरू हुई। बुधवार को अमित शाह चर्चा का जवाब देंगे और उसके बाद तीनों विधेयकों को पारित किया जाएगा।

वाईएसआर कांग्रेस ने विधेयक का किया समर्थन. 

माना जा रहा है कि सरकार गुरूवार और शुक्रवार को राज्यसभा में भी इन विधेयकों पर चर्चा कराकर पास कराने की कोशिश करेगी। विपक्ष की गैरमौजूदगी में चर्चा की शुरूआत वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के टी रंगैय्या ने की। तीनों संशोधन विधेयकों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की जरूरत के अनुसार आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

बीजद सांसद ने भी दिया अपना समर्थन

वहीं, बीजद के भतृहरि माहताब ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली लोगों को समय पर न्याय दिलाने में विफल साबित हो रही थी। इसके लिए मुख्य तौर पर औपनिवेशिक कानूनों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भी हम 160 साल पुराने कानूनों से काम चला रहे थे। इनकी जगह भारतीय जरूरतों के मुताबिक प्रस्तावित नए कानूनों का उन्होंने समर्थन किया।

उन्होंने हिंदी में इन कानूनों के नाम के उच्चारण में दिक्कत की विपक्षी नेताओं की शिकायत का जवाब देते हुए कहा कि लोगों ने इसका भी हल निकाल लिया है और भारतीय न्याय संहिता को वीएनएस के संक्षिप्त नाम से बुलाने लगे हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी के प्रिंस राज ने नए कानूनों में जांच और अदालती सुनवाई की समय सीमा निर्धारित किये जाने को न्याय प्रक्रिया में बड़े बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि जनता को सिर्फ इस बात से मतलब है कि उन्हें कितने समय में न्याय मिलता है और ये तीनों कानून ये सुनिश्चित करते हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों पर रविशंकर प्रसाद का निशाना

वहीं, भाजपा की ओर से रविशंकर प्रसाद ने औपनिवेशिक दासता के प्रतीक इन तीनों कानूनों को अभी तक नहीं बदलने के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई आयोगों ने इन कानूनों को भारतीय जरूरत के मुताबिक बदलने का सुझाव दिया था। लेकिन गुलाम मानसिकता के कारण इसे नहीं किया जा सका।
उन्होंने कर्तव्य पथ पर सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति को लगने और राम मंदिर के निर्माण में देरी को भी इसी गुलाम मानसिकता की देन बताया। उनके अनुसार इसी मानसकिता के कारण कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले के प्राचीर से गुलामी के सभी प्रतीकों को खत्म करने का आह्वान किया था और इस क्रम में अंग्रेजों के जमाने के 1500 से अधिक कानून को खत्म किया जा चुका है।

विपक्ष के हंगामे के कारण नहीं हो पाई चर्चा

गृहमंत्री अमित शाह ने लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार तीनों संशोधन विधेयक को संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया था, जहां उसे गृह मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति के पास और अधिक विचार-विमर्श के लिए भेज दिया गया था। स्थायी समिति के सुझावों को शामिल करते हुए नए संशोधित विधेयक को अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में पेश किया था और गुरूवार और शुक्रवार को 14 घंटे की चर्चा तय हुई थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इस पर चर्चा शुरू नहीं हो पाई थी।

देश के 13,520 एनजीओ को मिले भर-भर कर विदेशी फंड, दो वर्षों में 55,742 करोड़ की मदद ।
एएनआई, नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2019 से 2021 के बीच देश के 13,520 गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेशी योगदान में 55,742 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए एनजीओ को विदेशी अंशदान विनिमय अधिनियम (एफसीआरए) 2010 के तहत पंजीकरण कराना होता है।

दो साल में कितने आवेदन मिले?

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में सवाल के लिखित जवाब में बताया कि गत दो वर्षों 2021 व 2022 में एफसीआरए, 2010 के तहत कुल 1615 आवेदन प्राप्त हुए। इनमे से 14 दिसंबर 2023 तक 722 को मंजूरी और 225 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आवेदनों को एफसीआरए 2010 के प्रविधानों के तहत बनाए गए नियमों के तहत पात्रता मानदंड पूरा नहीं करने पर निरस्त किया गया। देश के रिकार्ड में 95 हजार से अधिक विदेशी अपराधी दर्जगत नवंबर तक विदेशी मूल के अपराधियों का राष्ट्रीय डाटाबेस (एनडीओएफओ) में 95 हजार से अधिक विदेशी अपराधी दर्ज हैं।
एनडीओएफओ की क्यों हुई स्थापना?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनडीओएफओ की स्थापना का उद्देश्य विदेशी मूल के अपराधियों पर नजर रखने और उनके खिलाफ प्रभावी जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करना है। नित्यानंद राय ने लोकसभा में सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एनडीओएफओ ई-प्रिजन (राष्ट्रीय जेल सूचना पोर्टल) पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रखे गए डाटा का प्रयोग करता है।

Manipur: मणिपुर में हिंसा के बाद चुराचांदपुर जिले में धारा 144 लागू, स्थिति अभी भी तनावपूर्ण ।
पीटीआई, चुराचांदपुर (मणिपुर)। मणिपुर सरकार ने नए सिरे से हिंसा के बाद चुराचांदपुर जिले में दो महीने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा आदेश लागू किया है। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है। इस पूर्वोत्तर राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस साल मई के बाद से जातीय संघर्ष जारी है।

चुराचांदपुर जिले में सोमवार को खासतौर पर थिंगकांगफई गांव में कई स्थानों पर हिंसा की छिटपुट घटनाएं दर्ज की गईं। जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश में कहा, ‘‘लोगों के दो समूहों के बीच टकराव के कारण शांति भंग होने की आशंका अब भी है…और स्थिति अभी तनावपूर्ण है।’’

निषेधाज्ञा आदेश सोमवार को लागू किया गया और यह 18 फरवरी 2024 तक लागू रहेगा। इसके तहत पांच और उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने तथा हथियार रखने पर मनाही है। जिला मजिस्ट्रेट धारुन कुमार एस. ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए सभी प्रयास किए हैं।

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद जातीय हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 180 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, वे 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं

Tamil Nadu: मद्रास HC ने संपत्ति मामले में मंत्री पोनमुडी को बरी करने का आदेश किया रद्द, 21 दिसंबर को सुनाई जाएगी सजा ।
पीटीआई, चेन्नई। उच्च शिक्षा मंत्री और द्रमुक नेता के पोनमुडी और उनकी पत्नी पी विशालाक्षी को मद्रास उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, कोर्ट ने मंगलवार को 1.75 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी बरी करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया।

सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा दायर अपील पर आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन ने मंत्री और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया है। साथ ही, उनकी सुनवाई के बाद सजा सुनाने के लिए 21 दिसंबर को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

1.75 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला

न्यायाधीश ने मामले में पोनमुडी और उनकी पत्नी को बरी करने के विल्लुपुरम के प्रधान जिला न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया। अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि पोनमुडी ने 2006 और 2011 के बीच डीएमके शासन में मंत्री रहते हुए अपने नाम और अपनी पत्नी के नाम पर 1.75 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी।

सुनवाई के बाद होगा फैसला

आशंका जताई जा रही है कि उच्च शिक्षा मंत्री और द्रमुक नेता के पोनमुडी को अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है, जो अदालत द्वारा सजा की घोषणा के बाद स्पष्ट होगा।

India At 47: 2047 तक देश को विकसित बनाने की कमान होगी युवाओं के हाथ, केंद्र ने शुरू किया देशव्यापी अभियान ।
ब्यूरो, नई दिल्ली। वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का लक्ष्य भले ही तय कर लिया गया है, लेकिन उस विकसित भारत का स्वरूप क्या होगा, उसके मानक क्या होंगे, जैसे अनगिनत सवालों का जवाब अब देश के युवा खोजेंगे और सुझाव भी देंगे। वैसे भी दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश भारत है।

फिलहाल, सरकार ने इसे लेकर एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में देश को विकसित बनाने के लिए छात्रों के बीच एक परिचर्चा आयोजित की जाएगी। इस बीच, छात्रों की ओर से मिलने वाले सुझावों को संकलित किया जाएगा और सरकार के साथ साझा भी किया जाएगा।

यूजीसी ने विश्वविद्यालय के प्रमुखों को पत्र लिखा

शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें संस्थानों से छात्रों के बीच इस पर चर्चा कराने के सुझाव दिए गए हैं। खास बात यह है कि छात्रों के बीच इस चर्चा के लिए जो प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं, उनमें भारतीयों को सशक्त बनाना, टिकाऊ अर्थव्यवस्था, इनोवेशन, साइंस एंड टेक्नोलाजी, बेहतर प्रशासन व सुरक्षा जैसी पांच थीमों को शामिल किया गया है।

भारत की लगाई छलांग का जिक्र किया गया

यूजीसी ने छात्रों के साथ ही देश की ओर से पिछले सालों में अलग-अलग क्षेत्रों में लगाई छलांग का जिक्र भी किया है। इसमें देश की अर्थव्यवस्था के दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग, कोविड संकट से निपटने की मुहिम और कम समय में कोविड वैक्सीन का निर्माण, जन-धन खाते के जरिये लोगों के जीवन में आए बदलाव, डिजिटल लेन-देन और खेल के क्षेत्र में देश की प्रगति को सामने रखा है।

भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था

यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को विकसित भारत को लेकर छात्रों के बीच चर्चा कराने के निर्देश के साथ ही जापान, जर्मनी, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के उदाहरण को भी सामने रखा है। गौरतलब है कि देश को विकसित बनाने की यह पहल उस समय तेज हुई है, जब भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

2027 तक दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

साथ ही वर्ष 2027 तक उसने स्वयं को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। उस समय उसकी अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डालर की हो जाएगी। वहीं, यदि अर्थव्यवस्था के बढ़ने की यही रफ्तार रही तो 2047 तक उसकी अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। जो किसी भी देश के विकसित होने की बड़ी निशानी होगी।

I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक खत्म : बीजेपी को घेरने पर हुआ मंथन, सांसदों के निलंबन के साथ EVM पर हुई चर्चा ।

देश की राजधानी नई दिल्ली के एक होटल में चल रही I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक खत्म हो गयी है। इस मीटिंग में बीजेपी को घेरने के लिए रणनीति बनी। इसके साथ ही सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।

3 घंटे चली मेगा मीटिंग
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक कल 3 घंटे चली I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक में EVM पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक इंडिया गठबंधन की बैठक में संसद से विपक्षी सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर चर्चा हुई और इसकी निंदा की गई। जानकारी के अनुसार कल (20 दिसंबर) सुबह 9 नौ बजे कांग्रेस संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है।
खरगे का नाम ममता बनर्जी ने किया आगे
*जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम प्रत्याशी बनाने की मांग की है।* ममता बनर्जी की इस मांग का दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सपोर्ट किया। हालांकि, इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। वहीं, INDIA गठबंधन की बैठक पर JMM सांसद महुआ माजी ने कहा कि "सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई हैं।
प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर भी चर्चा हुई। अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।"

सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों को 31 दिसम्बर तक अनिवार्य रूप से करवाना होगा वार्षिक भौतिक सत्यापन 

बीकानेर, 19 दिसंबर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभान्वितों को 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन करवाना होगा। जिले में कुल 2 लाख 56 हजार 995 पेंशनर्स है, जिसमें से 1 लाख 85 हजार 185 वृद्धजन पेंशनर्स, 54 हजार 174 विधवा पेंशनर्स तथा 16 हजार 767 विशेष योग्यजन पेंशनर्स लाभान्वित है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक एल.डी. पंवार ने बताया कि वर्तमान में कुल 2 लाख 56 हजार 995 पात्र पेंशनर्स में से 1 लाख 15 हजार 717 (45.03 प्रतिशत) पेंशनर्स द्वारा सत्यापन करवा लिया गया है। जिसमें से शहरी क्षेत्र में 30 हजार 656 (50.66 प्रतिशत) एवं ग्रामीण क्षेत्र में 85 हजार 150 (43.34 प्रतिशत) पेंशनर्स का वार्षिक भौतिक सत्यापन करवाया गया है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनान्तर्गत पेंशनर्स को 31 दिसंबर तक वार्षिक भौतिक सत्यापन  से करवाया जाना  आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि पेंशनर्स द्वारा अपने वार्षिक भौतिक सत्यापन हेतु ई-मित्र कियोस्क राजीव गांधी केन्द्र/ ई-मित्र प्लस आदि केन्द्रों पर अंगुली की छाप (Finger Print Impression-Biometrics) बायोमैट्रिक्स से करवाया जा सकेगा। अंगुली की छाप (Finger Print Impression-Biometrics) बायोमैट्रिक्स से वंचित रहे पेंशनर्स का वार्षिक भौतिक सत्यापन आईरिस स्कैन से भी करवाया जा सकेगा।
वार्षिक भौतिक सत्यापन हेतु विकसित एन्ड्राइड मोबाइल एप (Rajasthan Pension and Aadhar FaceRD) के माध्यम से लाभार्थी के फेस रिकाग्निशन के आधार पर किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि किसी पेंशनर का वार्षिक भौतिक सत्यापन नहीं होने की स्थिति में यदि पेंशनर पेंशन स्वीकृतकर्ता अधिकारी (विकास अधिकारी/ उपखण्ड अधिकारी) के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होता है, तो पेंशन स्वीकृतकर्ता अधिकारी (विकास अधिकारी/ उपखण्ड अधिकारी) SSP. Rajasthan.gov.in Portal पर लॉगइन कर संबंधित पेंशनर का पीपीओ नंबर दर्ज करने पर उस पेंशनर के रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के आधार पर भौतिक सत्यापन किया जा सकेगा।
ऐसे पेंशनर्स जो अत्यधिक वृद्धावस्था, शारीरिक अस्वस्थता के कारण वार्षिक भौतिक सत्यापन करवाने के लिए घर से बाहर जाने ने असमर्थ है तो संबंधित स्वीकृतिकर्ता अधिकारियों द्वारा ऐसे पेंशनर्स का मोबाइल एप्प के माध्यम से घर बैठे ही वार्षिक भौतिक सत्यापन करवा सकेंगे।

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